लग्न के अनुसार जानिए अपना स्वभाव और व्यक्तित्व(Know your nature and personality according to the twelve ascendants)
लग्न के अनुसार जानिए अपना स्वभाव और व्यक्तित्व(Know your nature and personality according to the twelve ascendants):-जन्म पत्रिका निर्माण में सबसे पहले गणित के माध्यम से लग्न का ही निर्धारण किया जाता है, क्योंकि जन्म पत्रिका में लग्न का बड़ा महत्व है। राशियां बारह होती है और बारह राशियों के नाम से लग्न को पुकारा जाता है। यानी लग्नों की संख्या बारह होती है। व्यक्ति के जन्म के समय आभा मण्डल में पूर्वी क्षितिज में जो राशि उदित होती है, उस राशि का नाम लिखकर उसके अंक को जन्म पत्रिका के प्रथम भाव में लिख देते हैं। लग्न को प्रथम भाव, केंद्र एवं त्रिकोण भी कहते हैं।
बारह लग्नों का सामान्य परिचय व स्वभाव और लग्न के अनुसार जानिए अपना स्वभाव और व्यक्तित्व(Know your nature and personality according to the twelve ascendants):-
मेष राशिगत लग्न:-मेष राशि के मालिक ग्रह भौम को माना जाता है। इस लग्न का व्यक्ति सामान्य लम्बाई या ऊँचाई से युक्त देह की गठन वाले, लम्बी गर्दन, गोल आंखे, घुंघराले बालों वाला होता हैं। व्यक्ति की कुछ न कुछ कार्य करते रहने की प्रवृत्ति से अपने आपको व्यस्त रखने वाला होता है। ये अपने दुश्मनों को चारों खाने चित करने वाले होते हैं, परिवार में बहुत सारे सदस्यों से युक्त होते हैं। इस लग्न वाले देखने में बहुत ही अकर्षल, बहुत सारी खूबियों वाले, किस्मत का साथ मिलता है जिससे किस्मत के द्वारा हर खुशी प्राप्त करने वाले और धर्म पर निष्ठा रखने वाली भार्या मिलती हैं। इस लग्न के व्यक्ति के पुत्र का चाल-चलन या चरित्र से बदनाम होते हैं, लेकिन तनुजा सरल स्वभाव वाली कला-कुशल होती हैं। ऐसे व्यक्ति की धन-दौलत स्थायी रूप से इनके पास नहीं टिकती हैं। मेष लग्न वाले को सूर्य सबसे ज्यादा फल देने वाला होता हैं।
वृषभ राशिगत लग्न:-वृषभ लग्न का स्वामी शुक्र ग्रह को माना गया है। यह राशि धरती तत्त्व की होती है। व्यक्ति प्रायः क्षीण शरीर वाला, छोटी गर्दन तथा हष्ट-पुष्ट सुंदर बदन वाला होता है। व्यक्ति अमनपसंद करने वाला, सोच-विचार करने में सक्षम, लेकिन मिजाज से थोड़ी-थोड़ी बातों पर बिगड़ने वाला होता है। किसी भी कार्य को करते समय सोच-समझकर अपने मन को एक जगह पर केंद्रित करके करने वाला होता है। इस लग्न के व्यक्ति के दोस्त बहुत अधिक होते हैं। प्रारम्भिक जीवन में बहुत मेहनत करनी पड़ती हैं, जिससे वह निरन्तर अपनर जीवन के विकास में प्रयास करने वाला होता हैं लेकिन जीवन का मध्य व अंतिम भाग आंनद से व्यतीत करने वाला होता है। इनकी किस्मत एकाएक साथ देने लगती हैं। इनकी भार्या बहुत कंजूस और कला जानने वाली मिलती है। इस लग्न के व्यक्ति का झुकाव स्त्री के प्रति अधिक होता है। वृषभ लग्न वाले के लिए शनि उत्तम होता है और राजयोग प्रदान करने वाला होता है।
मिथुन राशिगत लग्न:-मिथुन लग्न का स्वामी ग्रह बुध है। यह राशि वायु तत्त्व की है। इस लग्न वाले व्यक्ति लम्बे-कमजोर शरीर वाले होते है। चेहरा खुशी से खिला-खिला होता है और बहुत जल्दी से सब बातें को समझ लेने वाले एवं बातचीत करने में दक्ष होते हैं। लेकिन इस लग्न के जातक अपना फायदे पहले सोचने वाले, रुपये-पैसों से युक्त और सोच-समझकर एवं सलीके से किसी भी काम को करने वाले होते हैं। कला व विज्ञान के प्रति रुचि रखते हैं। कठिन से कठिन विषय की भी सरलता से भली-भाँति परीक्षण करने में माहिर होते हैं। इनको कम बुद्धि वाली भार्या मिलती हैं। लेकिन इनके तनु सरल स्वभाव वाले होते हैं। मिथुन लग्न वाले के लिए शुक्र फलदायक होता हैं। शुक्र-बुध के योग से भाग्य की उन्नति होती हैं।
कर्क राशिगत लग्न:-कर्क लग्न का स्वामी ग्रह चन्द्रमा है। यह राशि जल तत्त्व की है। इस लग्न के व्यक्ति मध्यम कद के मोटी गर्दन व मांसल शरीर वाले, सबसे मेलजोल रखने वाले और साफ-सुथरे रहने वाले होते हैं। समझदार, दूसरों के हित के काम करने वाले, सुखयुक्त और रुपयों-पैसों से सम्पन्न होते हैं। ऐसे व्यक्ति अधिकतर जन्म स्थान से दूर रहते हैं। इस लग्न वाले व्यक्ति की भार्या अपने पति के प्रति पूर्ण रूप से निष्ठा व अनुराग रखने वाली, धर्म में आस्था रखने वाली और गुणवती होती है। इस लग्न वाले व्यक्ति को मगंल ग्रह उत्तम फल प्रदान करने वाला होता है।
सिंह राशिगत लग्न:-सिंह लग्न का स्वामी ग्रह सूर्य है। यह राशि अग्नि तत्त्व की है। इस लग्न वाले व्यक्तियों के मुख की आकृति चौड़ी व हड्डियां पुष्ट होती है। ऐसे व्यक्ति अपना जीवन आनन्दपूर्वक व्यतीत करते है। किसी भी बात को खरी-खरी कहने वाले और औरत से लगाव करने वाले होते है। लेकिन विद्या कम प्राप्त होती है और अपनी मर्यादा में रहते हुए कठिन से कठिन समस्या को धैर्यपूर्वक सुलझाने में कुशल होते है। अपनी दोस्तों को पूर्ण जिम्मेदारी से निभाने वाले होते है। रहन-सहन बड़े लोगों जैसा होता है। इन्हें भार्या अच्छी, स्थिर स्वभाव की और आज्ञापालक मिलती है। ये संतान पक्ष से सूखी नहीं होते है। विवाह में स्त्री पक्ष से धन लाभ होता है। सिंह लग्न वालों के लिए मगंल ग्रह उत्तम फलकारक है। यदि गुरु का मगंल से योग हो, तो राजयोग कारक हो जाता है।
कन्या राशिगत लग्न:-कन्या लग्न का स्वामी बुध ग्रह होता है। यह राशि भूमि तत्त्व की होती है। इस लग्न वाले व्यक्ति के कंधे व बाजू हष्ट-पुष्ट होते हैं। व्यक्ति अपने दिए हुए वचन पर दृढ़ रहने वाला तथा जो सबके प्रति एक नजर से इंसाफ करने वाला और दया करने वाले होते है। गलत कार्यों को करने से मना करने वाले होते हैं। प्रत्येक कार्य को बड़ी सावधानी व चौकसी से करते है। यानी बिना सोचे-समझे किसी कार्य को नहीं करते हैं। व्यापार में निपुण होते हैं। इनकी भार्या मध्यम स्वभाव व कम बोलने और हँसी-मजाक से दूर रहने की प्रकृत्ति वाली होती हैं। संतानें पितृ-मातृ भक्त व अच्छे चाल-चलन वाली होती हैं। कन्या लग्न वाले को बुध व शुक्र शुभदायी ग्रह होते हैं।
तुला राशिगत लग्न:-तुला लग्न का स्वामी ग्रह शुक्र होता है। राशि वायु तत्त्व होती हैं। इस लग्न के व्यक्ति प्रायः कमजोर शरीर से यक्त और लम्बे होते हैं। अगर लग्न का स्वामी लग्न में हो तो शरीर मांसल मोटे होता है। इन व्यक्तियों को अपने दोस्तों के द्वारा मदद मिलती है। इन लग्न के व्यक्ति अनिश्चित विचार, उदार प्रकृति और खर्चीला स्वभाव के होते हैं। सबसे मेलजोल रखने वाले होते हुए दूसरों की मदद करने में इन व्यक्तियों को प्रसन्नता मिलती है। स्वयं को व घर को हमेशा साफ-सुथरा रखने में तत्पर रहते है। इस लग्न वाले को जल्दी गुस्सा आता है और जल्दी ही शांत हो जाता है। अपने से उच्च श्रेणी के व्यक्तियों से मित्रता होती है। इन लोगों को स्त्री दूसरों को कष्ट पहुँचाकर सुखी रहने वाले और नटखट मिजाज की मिलती है। इनकी संतानें गुणी और अच्छी होती है। शनि व बुध उत्तम फल प्रदान करते हैं।
वृश्चिक राशिगत लग्न:-लग्न का स्वामी मगंल ग्रह होता है। यह राशि जल तत्त्व है। इस लग्न के व्यक्ति दिखने में सबको अपनी तरफ खींचने वाले खूबसूरत होते है, लेकिन स्वभाव से बहुत ही गुस्सा करने वाले होते हैं। सच्ची बात को स्पष्ट कहने और झूठ बोलने की प्रवृत्ति होती है। अपने विरुद्ध बोलने वाले के शत्रु बन जाते है। इन लोगों को खूबसूरत भार्या और अच्छे संस्कारों की मिलती है। संतान पक्ष अच्छा होता है और विद्वान और श्रेष्ठ होती है। धार्मिक कार्यों में धन खर्च करने वाले होते है। इस लग्न वालों को सूर्य और चन्द्रमा अच्छा फल प्रदान करते हैं।
धनु राशिगत लग्न:-इस लग्न वाले व्यक्ति के कान बड़े-बड़े होते हैं। राशि तत्त्व अग्नि है। इस लग्न के व्यक्ति अक्लमंद और कई भाषाओं के जानकार होते है। यदा-कदा दूसरों के प्रति व्यंग्य के शब्दों की वर्षा करने वाले शब्दों का उपयोग भी करते हैं। ऐसे लग्न के व्यक्तियों को प्रायः खूबसरत मन को भाने वाली, रुपयों-पैसों से सम्पन्न और विनयी सुशील भार्या की प्राप्ति होती हैं। संतानें साधारण एवं पैतृक संपत्ति का उपयोग करने वाली होती है। इस लग्न वालों को सूर्य औ मगंल ग्रह का शुभ फल प्रदान करने वाले होते हैं।
मकर राशिगत लग्न:-इस लग्न के व्यक्ति लम्बे व पतले होते है। राशि तत्त्व भूमि हाति है। इस लग्न के व्यक्ति आनंद तथा तत्परता के साथ काम में लगने वाले और बहुत मेहनती होते है। अपने विचारों को बिना छुपाये खुले रूप से प्रकट करने वाले होते है। मिजाज से किसी पर भी शक करने वाले होते हैं। प्रत्येक कार्य को विचार कर के चौकसी से करने वाले होते हैं। अपने अधीनस्थ व्यक्तियों से काम लेने में सोच-समझकर एवं सलीके से काम को करवाने वाले होते है। अपने दोस्तों के समूह में सबसे बढ़कर होते हैं। स्त्री पक्ष से बहुत दुःखी रहते हैं। अनेक व्यवसाय करते है। इस लग्न वालों को बुध व शुक्र ग्रह शुभ फल प्रदान करने वाले होते है।
कुंभ राशिगत लग्न:-इस लग्न के व्यक्ति के शरीर की बनावट मन को भाने वाली होती है। कुंभ राशि वायु तत्त्व की है। दूसरों की भलाई करने वाला और दया करने की प्रकृति होते है। अपने पुरुषार्थ से धन कमाते है और आनन्दमय जीवन व्यतीत करते है। इन लोगों को प्रायः राजपक्ष से लाभ प्राप्त होता है। भार्या का मिजाज ठीक नहीं होता हैं। संतान पक्ष भी अच्छा नहीं होता है। इस लग्न वालों को शुक्र उत्तम प्रदान करता हैं।
मीन राशिगत लग्न:-इस लग्न वालों का शरीर देखने में खूबसूरत और डील-डाल वाला होता है। मीन राशि तत्त्व जल होता है। इस लग्न के व्यक्ति सुख-भोग विलासी जीवन व्यतीत करने वाले होते है। रुपयों-पैसों को खर्च करने में दिलेर होते है। समय का सोच-समझकर एवं सलीके से ठीक-ठाक उपयोग करते हुए काम करने वाले होते है। इन लोगों को प्रायः भार्या खूबसूरत सरल स्वभाव की लेकिन कूटनीतिक स्वभाव वाली मिलती हैं। मगंल ग्रह उत्तम फल प्रदान करने वाला होता है। बृहस्पति-मगंल योग से राजपक्ष से लाभ प्राप्त होता है। उपरोक्त व्याख्या साधारण और संक्षिप्त है।



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