राशियों के नतीजे पांचवें भाव में(Results of zodiac signs in the fifth house):-
1. मेष राशि :- जन्मकुंडली के पांचवे भाव में पहली राशि मेष होने से मनुष्य कठोर और बुरे काम करने वाले होते है।
◆मनुष्य को सब तरफ से दुःख मिलता है।
◆मनुष्य विकार से युक्त और माया रूप से युक्त होता है।
◆मनुष्य के पुत्र खराब व बुरे चाल-चलन वाले होते है।
2. वृषभ राशि :- जन्मकुंडली के पांचवे भाव में दूसरी वृषभ राशि होने से मनुष्य का भगय साथ देता है।
मनुष्य दिखने में सुंदर रूप वाले होते है।
◆मनुष्य अपने कार्य एवं धर्म में रुचि वाले पुत्रों से युक्त होता है ।
◆मनुष्य की औरत तेज से युक्त होती है।
3. मिथुन राशि :- जन्मकुंडली के पांचवे भाव में तीसरी मिथुन राशि होने से मनुष्य दिखने बहुत ही सुंदर होते है।
◆मनुष्य सरल व सीधे-साधे और गुणों से युक्त होते है।
◆मनुष्य तेज से युक्त और मजबूत पुत्रों वाले होते है।
4. कर्क राशि :- जन्मकुंडली के पांचवे भाव में चौथी कर्क राशि होने से मनुष्य पुत्र सन्तान की इच्छा रखने वाले होते है।
◆मनुष्य सामाजिक जीवन में प्रसिद्ध होता है।
◆मनुष्य की चारों ओर यश मिलता है।
◆मनुष्य अपने तजुर्बे से रुपये-पैसे कमाने वाले होते है।
◆मनुष्य के सुशील सन्तान पुत्र वाले होते है।
5. सिंह राशि :- जन्मकुंडली के पांचवे भाव में पांचवी सिंह राशि होने से मनुष्य कठोर मिजाज के होते है।
◆मनुष्य के सुंदर आंखे होती है।
◆मनुष्य को मांसाहार में बहुत लगाव होता है।मनुष्य के ज्यादा लड़की सन्तान को पैदा करने वाले होते है।
◆मनुष्य मिजाज स तीखे होते है और अपने निवास जगह से दूसरी देश की जगह का भोग करने वाले होते है।
6. कन्या राशि :- जन्मकुंडली के पांचवे भाव में छठी कन्या राशि होने से मनुष्य पुत्र से हीन होता है।
◆मनुष्य भलाई के काम को करने वाले होते है।
◆औरत या आदमी को एक दूसरे से ज्यादा लगाव होता है।
◆मनुष्य में प्रतिभा कूट कूट कर भरी होती है।
◆औरत या आदमी धर्म व नीति के विरुद्ध करने वाले गुनाह से तुच्छ होते है।
◆औरत या आदमी के पुत्री सन्तान आभूषण से ज्यादा लगाव वाली होती है।
7. तुला राशि :- जन्मकुंडली के पांचवे भाव में सातवीं तुला राशि होने से मनुष्य सुशील और सुंदर होते है।
◆मनुष्य दिखने में आकर्षक रूप के होते है।
◆मनुष्य की सन्तान पुत्र कर्मठ और पढ़े-लिखे होते है।
8. वृश्चिक राशि :-जन्मकुंडली के पांचवे भाव में आठवीं वृश्चिक राशि होने से मनुष्य सुशील और इनका भाग्य साथ देता है।
◆मनुष्य बिना किसी जानकारी से दोष लगने से दोषी बन जाते है।
◆मनुष्य अपने कुल के धर्म को मानने वाले और उस धर्म के प्रति लगाव वाले पुत्र होते है।
◆मनुष्य विनीत और सुशील होते है।
9. धनु राशि :- जन्मकुंडली के पांचवे भाव में नवी धनु राशि होने से घोड़ा के रास्ते मे या घोड़ो को चलाने में उस्ताद होते है।
◆मनुष्य की रुचि धनुष विद्या में माहिरत हासिल किए होते है।
◆मनुष्य के किसी भी तरह से दुश्मनी वाले दुश्मन नहीं होते है।
◆मनुष्य के अंदर सेवा की सोच कूट-कूट कर भरी होती है।
◆मनुष्य की पुत्र सन्तान राजकीय सेवा से सम्मानित होती है।
10. मकर राशि :-जन्मकुंडली के पांचवे भाव में दशवीं मकर राशि होने से मनुष्य धर्म व नीति के बारे में बिना जानकारी के बुद्धि वाले होते है।
◆मनुष्य दिखने रूप से तुच्छ होते है और उनमें न स्त्रीत्व के गुण और न पुरुषत्व के गुण होते है।
◆मनुष्य के अलसी व निष्ठुर होते है।
11. कुंभ राशि :- जन्मकुंडली के पांचवे भाव में ग्यारहवीं कुंभ राशि के होने से मनुष्य स्थिर मिजाज के अधिक इच्छाओं को रखने वाले होते है।
◆मनुष्य हमेशा सत्य बोलने वाले और सत्य का साथ देने वाले होते है।
◆मनुष्य की बुद्धि तेज होने से इनको मान-सम्मान मिलता है और सामाजिक जीवन में प्रसिद्ध होते है।
◆मनुष्य नष्ट पुत्रों से युक्त एवं कष्ट पूर्ण पुत्रों वाला होता है।
12. मीन राशि :- यदि जन्मकुंडली के पंचम भाव में मीन राशि स्थित हो, तो जातक जल में आसक्ति वाला, अल्पपराक्रमी, बीमार, पाप कर्म करने वाला, हंसमुख स्वभाव वाले एवं स्त्रियों के वशीभूत रहने वाले पुत्रों वाला होता है।
◆जन्मकुंडली के पांचवे भाव में बारहवीं मीन राशि होने से मनुष्य को जल से ज्यादा लगाव रखने वाले और अल्प पराक्रमी होते है।
◆मनुष्य का मिजाज हमेशा हँसते हुए मुख के होते है।
◆मनुष्य के पुत्र अपनी औरतों के कहने में रहने वाले होते है।
