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Sunday, April 17, 2022

शिव पञ्चरत्नम् स्तुति अर्थ सहित और फायदे(Shiva Pancharatnam stuti with meaning and benefits)

Shiva Pancharatnam stuti with meaning and benefits





शिव पञ्चरत्नम् स्तुति अर्थ सहित और फायदे(Shiva Pancharatnam stuti with meaning and benefits):-भगवान शिवजी की अनुकृपा पाने के लिए श्रीकृष्णजी ने शिवपञ्चरत्नम् स्तुति की रचना की थी। इस स्तुति में पांच श्लोक हैं। इन पांच श्लोकों में शिवजी को अपनी पूजा से किस तरह से खुश किया जाता हैं, उनको खुश करने के लिए शिव पञ्चरत्नम् स्तुति का वांचन मनुष्य को नियमित रूप से करना चाहिए। जो मनुष्य नियमित रूप से इस स्तुति को करते हैं, उनको त्रिदेवों एवं त्रिदेवियों का भी आशीर्वाद प्राप्त हो जाता हैं। यह स्तुति शिवपुराण में बताई गई हैं, जो इस तरह हैं-


 

अथ शिवपञ्चरत्नम् स्तुति शिवमहापुराणे अर्थ सहित:-शिव- पुराण में भगवान शिवजी को खुश करने के लिए श्रीकृष्णजी के द्वारा र्चित शिवपञ्चरत्नम् स्तुती के बारे में वर्णन मिलता हैं।



      ।।अथ शिवपञ्चरत्नम् स्तुती शिवमहापुराणे।।


श्रीकृष्ण उवाच-भगवान श्रीकृष्णजी कहते हैं, की मनुष्य को नियमित रूप से शिवपञ्चरत्नम् स्तुती का वांचन करते रहना चाहिए, जिससे भगवान भोलेनाथ जी का आशीर्वाद मनुष्य को मिल सके, क्योंकि भगवान भोलेनाथजी सबसे पहले अपने भक्त की भक्ति पर प्रसन्न होते हैं।


मत्तसिन्धुरमस्तकोपरि नृत्यमानपदाम्बुजम्।

भक्तचिन्तितसिद्धिदानविचक्षणं कमलेक्षणम्।

भुक्तिमुक्तिफलप्रदं भवपद्मजाSच्युतपुजितम्।

कृत्तिवाससमाश्रये मम सर्वसिद्धिदमीश्वरम्।।१।।

अर्थात्:-हे शिवजी! आप कमल के पुष्प पर विराजित ब्रह्मा के समान आप सिन्धु में मस्त रहते हुए नृत्य करने वाले हो, जो भक्त मनुष्य आप पर पूर्ण विश्वास भाव रखते हुए आपकी पूजा-अर्चना करते हैं, उन मनुष्य की समस्त प्रकार की मानसिक चिंताओं को दूर करके उनको पूजा के फल के रूप में सिद्धि प्रदान करते हो, उस भक्त पर अपनी तीव्र दृष्टि से उसको अभय फल देते हो। हे कमल की तरह नेत्र वाले कमलेक्षण! आप मनुष्य को भोग एवं जन्म-मरण के बंधन से मुक्ति प्रदान करते हो, लक्ष्मीजी की तरह ही आपका पूजन होता हैं। हे सर्वसिद्धिमीश्वर! समस्त सृष्टि में रहने वाले समस्त जगत के स्वामी हो।


वित्तदप्रियमर्चितं कृतकृच्छ्रतीव्रतपश्चरैः।

मुक्तिकामिभिराश्रितैर्मुनिभिर्दृढामलभक्तिभिः।

मुक्तिदं निजपादपङ्कजसक्तमानसयोगिनाम्।

कृत्तिवाससमाश्रये मम सर्वसिद्धिदमीश्वरम्।।२।।

अर्थात्:-हे सर्वसिद्धिदमीश्वर! जो मनुष्य अपने मन से अच्छे विचारों के साथ दान करते है, वे मनुष्य आपको बहुत ही प्यारे होते हैं। मनुष्य के द्वारा किये गए बुरे कर्मो से मिलने वाली तेज पीड़ा से मुक्ति के लिए आपसे अरदास करने पर आप उस मनुष्य के प्रायश्चित को माफ कर देते हो।जब मनुष्य के द्वारा आपसे अपनी भक्ति के द्वारा लगाव हो जाता हैं, तो उन मनुष्य को आपके चरण कमलों की सेवा करने का अवसर प्राप्त होता है, जिससे उन मनुष्य का निश्चित रूप से उद्धार हो जाता हैं


कृतदक्षमखाधिपं वरवीरभद्रगणेन वै।

यक्षराक्षससमर्त्यकिन्नरदेवपन्नगवन्दितम्।

रक्तभुग्गणनाथहृदभ्रमराञ्चिताङ्घ्रिसरोरुहम्।

कृत्तिवाससमाश्रये मम सर्वसिद्धिदमीश्वरम्।।३।।

अर्थात्:-हे सर्वसिद्धिदमीश्वर! आप अपने नेत्र की तीव्र ज्योति से वीरभद्र रूप को निर्मित किया था। आपकी कुबेर के गणों एवं उनकी निधियों की रक्षा करने वाली देवयोनि में जन्में यक्ष, दुष्ट स्वभाव एवं दयाहीन योनि में जन्में निशाचर, हिमालय में रहने वाली मंगोल रक्त  प्रधान पीत रंग के मनुष्य किन्नर, सर्प और देवता आदि भी आपकी वन्दना करते हैं। हे गणों के स्वामी! जिस तरह षटपद लाल रंग के कमल से मिठास का संचय करता हैं, उसी तरह आप भी मेरे हृदय में निवास करें। 


नक्तनाथकलाधरं नगजापयोधरनीरजा- 

लिप्तचन्दनपङ्ककुङ्कुमपङ्किलामलविग्रहम्।

शक्तिमन्तमशेषसृष्टिविधायकं सकलप्रभुम्।

कृत्तिवाससमाश्रये मम सर्वसिद्धिदमीश्वरम्।।४।।

अर्थात्:-हे प्रभु! आप समस्त तरह की कलाओं को जानते हो, बादल के द्वारा तेज बारिश जो कि पाषाण का भेद भी कर देती हैं, उस पाषण से युक्त कीचड़ में कमल की उत्पत्ति होती हैं, उस कमल के पुष्प से चन्दन के पाउडर और कुमकुम से आपका विग्रह किया जाता हैं। समस्त संसार में आपकी शक्ति के आगे कोई भी नहीं टिक पाता है, समस्त सृष्टि के कार्य को संपादन करने वाले हो समस्त जगत के स्वामी हो।


रक्तनीरजतुल्यपादपयोजसन्मणिनूपुरम्।

पत्तत्रयदेहपाटनपङ्कजाक्षशिलीमुखम्।

वित्तशैलशरासनं पृथुशिञ्जिनीकृततक्षकम्।

कृत्तिवाससमाश्रये मम सर्वसिद्धिदमीश्वरम्।।५।।

अर्थात्:-जिस तरह लाल रंग का कमल का पुष्प होता हैं, उस कमल पुष्प के बने हुए बहुमूल्य रत्न आदि आभूषण की तरह भगवान श्रीशंकरजी के चरणों की शोभा बढ़ाते हैं। जिस तरह भँवरा कमल की देह के पत्तों और पुष्प को तीन तरह से चीर-फाड़ देता हैं। जिस तरह पथरीले या पत्थर पर किसी भी तीर या भाले का फाल से भी चूर-चूर पत्थर को कर देता हैं, उसी तरह समस्त जगत को छीन-भिन्न करने की शक्ति शिवजी में हैं।


फलश्रुतिः-फलश्रुति का मतलब हैं, इसमे किसी भी कर्म को करने पर उस कर्म के करने से प्राप्त होने वाले फल के बारे में वर्णन होता हैं। जिससे सुनकर या पढ़कर या वांचन करके मनुष्य में उस कर्म को करने की तरफ जागृति होती हैं।


यः पठेच्च दिने दिने स्तवपञ्चरत्नमुमापतेः।

प्रातरेव मया कृतं निखिलाघतूलमहानलम्।

तस्य पुत्रकलत्रमित्रधनानि सन्तु कृपाबलात्।

ते महेश्वर शङ्कराखिल विश्वनायक शाश्वत।।६।।

अर्थात्:-जो मनुष्य प्रतिदिन शिव पञ्चरत्न स्तुति का वांचन करता हैं, जिस तरह प्रातःकाल के समय पर बारहमासी बेंत की तरह का एक पौधा होता हैं, उसके गूदेदार बिना रेशे की जड़ से पुष्प खिलता रहता है। जो मनुष्य प्रातःकाल को स्तुति करते हैं, उनको पुत्र सन्तान, सुयोग्य भार्या, मित्र और धन-सम्पत्ति की प्राप्ति होती हैं, इस स्तुति की कृपा से होती है। भगवान शिवजी जो विश्व का संचालन करने वाले प्रत्यक्ष है।


।।इति श्रीशिव महापुराणे च्युतपुरी माहात्म्ये श्रीकृष्ण कृत श्रीशिव-पञ्चरत्न स्तुतिः सम्पूर्णम्।।


श्रीशिव पञ्चरत्नम् स्तुति का वांचन करने से मिलने फायदे:-श्रीशिव पञ्चरत्नम् स्तुति का वांचन जो मनुष्य करते हैं, उनको भगवान शिवजी के द्वारा अनेक तरह के फायदे प्रदान करते हैं, जो इस तरह हैं-


1.पुत्र सन्तान पाने हेतु:-जिन मनुष्य को पुत्र सन्तान की चाहत होती हैं और उनको पुत्र सन्तान नहीं हो पाती हैं, तब उन दम्पति को भगवान शिवजी के श्रीशिव पञ्चरत्नम् स्तुति का वांचन शुरू करना चाहिए। जिससे भगवान शिवजी अनुकृपा उस दम्पति पर हो जाती हैं और पुत्र सन्तान की प्राप्ति भी हो जाती हैं। 


2.सुयोग्य भार्या एवं भरतार पाने हेतु:-लड़कीयों एवं लड़को को सुंदर व सुशील गुणवान भरतार एवं भार्या की चाहत को पूर्ण करने के लिए इस स्तुति को करने पर मनोकामना पूर्ण हो जाती हैं। 


3.अच्छे एवं मदद करने वाले मित्र:-मनुष्य को अपने जीवन में मददगार एवं अच्छे मित्र की जरूरत होती हैं, इसकी पूर्ति के लिए शिवजी की स्तुति करने पर मददगार एवं अच्छे मित्र की प्राप्ति होती हैं।


4.धन-संपत्ति पाने हेतु:-मनुष्य अपने जीवन में भागदौड़ करते है, तब भी वे धन-संपत्ति को संचय नहीं कर पाते हैं। इस तरह की परेशानी से मुक्ति का उपाय शिवजी की स्तुति से संभव हो जाता है।


5.समस्त तरह की सिद्धि पाने हेतु:-मनुष्य बहुत मेहनत करते हैं, लेकिन तब वे उनके बनते हुए कार्य बिगड़ जाते हैं, जिससे उनके मन में निराशा के भाव उत्पन्न हो जाते है। इस तरह अपने समस्त तरह के कार्य में सफलता को पाने हेतु मनुष्य को श्रीशिव पञ्चरत्नम् स्तुति का वांचन करना चाहिए।