Breaking

Wednesday, January 20, 2021

ज्योतिषीय प्रसव कितना सही कितना गलत हैं ?(How true and wrong are astrological births?)

            



ज्योतिषीय प्रसव कितना सही कितना गलत हैं ?(How true and wrong are astrological births?):-जब ईश्वर के विधान को किसी तरह से बदल नहीं दे सकते है तो जन्म के समय ईश्वर के विधान में व्यवधान पैदा करने का हक किसी को क्यों है और इसके परिणाम क्या होंगे।

मनचाही कुंडली बनवाकर समय से पहले प्रसव होने से पैदा होने वाले बच्चों के जीवन में क्या इस तरह से बनी कुंडलियां काम करेंगी,क्या ईश्वर का विधान,वेद और ज्योतिष शास्त्र झुठा साबित होगा।

"तालीम हो सरकार की रोटी हो खाद की,दूध हो डिब्बों का,तो संस्कृती कहां से आये बच्चों में मां-बाप की।"

विद्वान मनुष्य के द्वारा लिखी गई पंक्तियां आज के समय के बारे में लिखी थी,क्योंकि आज के समय पूरी दुनिया पूरी तरह से कृत्रिम(आर्टिफिशियल) जीवन पर ठहर गयी है,आर्टिफिशियल जीवन जीना आज के आधुनिक युग में संपन्नता की निशानी  माना जाता है तो किसी के वैभव का प्रतीक माना जाता है।

शास्त्रों में लिखा है कि बच्चे की पहली गुरु उसकी माता होती है और फिर पिता होता है,माता-पिता से ही बच्चे अपना जीवन की शुरुआत करते है फिर पहले उसकी पढ़ाई गुरुकुलों में हुआ करती थी जहां पर राजा और गरीब दोनों के बच्चे समान रूप से समान शिक्षा को प्राप्त करते थे आज उन गुरुकुलों की जगह पर आधुनिक सरकारी स्कूलों ने ले लिया है जहां सबसे पहले मां को मां से मम्मी और मम्मी से मॉम तथा पिता को पिता से डैडी और डैडी से डैड कहना सिखाया जाता है यानि जीते जी मां-बाप दोनों को अंग्रेजी के हिसाब से मरा हुआ समझाया जाता है और तो ओर जो भी अन्न को खाते है और जो दूध वो पीते है वह भी सब आर्टिफिशियल है खाने की हर चीज रसायनयुक्त जहरीली खाद से पकायी हुई होती है।

आज के युग में मां अपने बच्चे को जन्म देने के बाद अपनी शरीर की सुंदरता कम नहीं हो जावें इसके लिए अपने स्तनों से दूध तक नहीं पिलाना पसन्द करती है।इस तरह से सभी चीजें आर्टिफिशियल होने से बच्चे अपने मां-बाप की क्यों ख्याल रखेंगे वे मां-बाप को वृद्धावस्था में वृद्धाश्रम में भेजेंगे तो दोष बच्चे को होगा या मां-बाप का।

आज के युग में दुनिया इतनी आधुनिक हो गयी है और कृत्रिमता पर ठहर गयी है की अब तो आधुनिक औरतें भी अपना गर्भाधान भी आर्टिफिशियल तरीके से करने लगी है, परखनली से शिशु पैदा हो रहे है, सरोगेट मदर किराये पर ली जा रही है,किराये की कोख लेने के लिए लोग अच्छी-अच्छी कीमतें देने को तैयार हो जाते है। हमारे देश में ही हजारों की तादाद में गर्भाधान(फर्टिलिटी सेंटर) खुले हुए है जहांआर्टिफिशियल तरीके से बच्चे पैदा कराये जाते है।

आज के आधुनिक मां-बाप प्रसव(डिलेवरी) भी आर्टिफिशियल तरीके से कराने लगे है।

आज के समय में बच्चे के जन्म से पहले ज्योतिषी से कुण्डली बनवाकर किस समय,किस नक्षत्र और किस लग्न में बच्चे का पैदा होना शुभ होगा यह जानकर ज्योतिषी द्वारा बताये गये समय में सर्जरी के द्वारा बच्चे पैदा करवा रहे है और प्रसव भी करवा रहे है।

महानगरों में ज्योतिषी से अच्छा समय पूछकर बच्चे का जन्म कृत्रिमता से करवाने का फैशन हो गया है,लोग शान से अपने परिचितों से कहते है कि हमने अमुक ज्योतिषी से मुहूर्त निकलवा कर कुण्डली बनवाकर हमने बच्चा पैदा किया है,प्रसव करवाया है। इस तरह से बच्चा को पैदा करवाने से उस बच्चा का क्या भविष्य होगा और उस बच्चा की कुंडली से सही-सही फलादेश मिल सकेगा।

वैदिक ज्योतिष के अनुसार बच्चे का भविष्य उसकी माता के गर्भाशय में गर्भाधान के समय से ही तय हो जाता है,चिकित्सा शास्त्र के अनुसार गर्भ में जब भूर्ण तीन महीने का हो जाता है तो उसमें जीवन उत्पन्न हो जाता है वह सारी प्रक्रियाओं को महसूस कर सकता है। 

महाभारत काल में अर्जुन के पुत्र अभिमन्यु का जीवंत उदाहरण सामने है कि किस तरह अभिमन्यु ने मां के पेट में ही चक्रव्यूह को तोड़ना सीखा था। मां के गर्भाधान के समय जी यह तय हो जाता है कि बच्चे को कब पैदा होना है, कब इस संसार में आना है और तब क्या गोचर में ग्रहों की स्थिति होगी,क्या बच्चे की कुंडली होगी और क्या उसका भविष्य होगा।

पुरातन ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इंसान अपने पूर्व जन्म में किये गये अच्छे-बुरे कर्मों का फल भोगने के लिए इस संसार में जन्म लेता है और उसी के अनुरूप कब-कब उसे क्या अच्छा-बुरा परिणाम भोगना है।उसी हिसाब से गोचरस्थ ग्रहों और नक्षत्रों में उसका जन्म होता है और तत्समय उसकी कुंडली बनती है,वही कुंडली उसके जीवन भर सही रूप से काम करती है। ज्योतिष शास्त्र वेदों से निकला है और ज्योतिष शास्त्र को वेदों की आंख भी कहा जाता है, जिस तरह सूर्य,चांद अटल एवं सत्य है, उसी तरह ज्योतिष शास्त्र अटल और सत्य है, यह कभी भी गलत साबित नहीं हो सकता है।

जन्म होना और मरण होना ईश्वर के बनाये हुए विधान है। आज तक संसार का कोई भी वैज्ञानिक मौत पर विजय को प्राप्त नहीं कर सका है,तो फिर विचारने की बात है कि जब ईश्वर के बनाये हुए विधान को किसी भी तरह से नहीं बदल सकते है,तो जन्म के समय ईश्वर के विधान में बाधा पैदा करने का हक किसी को क्यों है और इसके नतीजे क्या होंगे। जन्म से पूर्व की कुंडली बनवाकर प्रसव करवाना ईश्वर के विधान के साथ खिलवाड़ और उस परम् पिता परमात्मा की सत्ता को चुनौती देने के समान काम है।

यह सोचने व मनन करने वाली बात है कि अपनी मनचाही कुंडली बनवाकर समय से पहले प्रसव होने वाले बच्चों के जीवन में क्या कुंडलियां काम करेगी।

क्या ईश्वर का विधान,वेद और ज्योतिष शास्त्र झुठा साबित होगा।

क्या ईश्वर के विधान पर ज्योतिषी विजय प्राप्त कर लेंगे।

यह तो आने वाला समय ही बतायेगा जब यह प्रसव से पूर्व जन्में बच्चे बड़े हो जायेंगे और तब ज्योतिषी को देखना है कि उनकी बनी हुई कुंडलियां उनके जीवन में कार्य करेगी या उन्हें इसके बुरे परिणाम भोगने होंगें।

इस तरह से जन्म से पूर्व कुंडली बनवाकर बच्चे का जन्म करवाना ठीक नहीं होता है और अपने ईश्वर के बनाये हुए विधान को इस तरह चुनौती देने सर्वथा गलत है।

इस तरह आज के आधुनिक मनुष्य को सोचना चाहिए कि कुंडली बनवाकर प्रसव करवाना ठीक है या प्रसव के बाद कुंडली बनवाना ठीक है।

इस तरह से जन्म पूर्व कुंडली बनवाने से क्या ज्योतिषियों के भला होगा या प्रसव पूर्व जन्में बच्चे का भला होगा।